बड़ा बेटा

बड़ा बेटा...
जब देखता है,
बीमार माँ को,
बूढ़े होते बाप को,
और बड़ी होती बहन को।

भूल जाता है ,

अपने सारे शौक को।

पहन लेता है,

जूते बाप के।

और उठा लेता है,

सारी जिम्मेदारियों को।


भूल जाता है,
अपने सारे सुनहरे ख्वाबों को।
न सफर का पता होता है,
और न मंजिल का।
फिर भी चल पड़ता है,
एक अनजानी डगर को।

भूल जाता है,

ईश्क़ मोहोब्बत को

प्रेम को ,प्रेमी को।


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